आज के परिवेश मे नारी
बहू आज प्यारी सी लाडो दुल्हन बन गई हैं। नन्ही सी कली आज दरख्त बन गई हैंम है। नाजुक से कंधों पर जिम्मेदारी बडी है। आज माँ की दुलारी बहू बन गई हैं। आज प्यारी....... देर तक सोने वाली, अब भोर में उठ रही है। सुबह की चाय से लेकर रात के भोजन रच रही है। माँ ने कुछ नहीं सिखा कर भेजा सासु कह रही है। बहू ने सब्जी में नमक ज्यादा डाल दिया था। इसीलिए उसके माँ के संस्कारों की हजामत हो रही है। आज प्यारी........ भाभी चाय लाना बिस्तर पर बैठी ननद कह रही है। कॉलेज में ज्यादा थक गई लाडो उसकी मां कह रही है। सुबह से एक काम ढंग का नहीं हुआ अब चाय अच्छी लाओ। मेरी फूल सी बच्ची कॉलेज में खप रही है और यह महारानी। इन बातों को सुनकर उसकी आँखें छलक रही हैं। आज प्यारी.......... ससुराल में सब बडे होंगे तुमसें कद (उम्र)छोटे मगर पद बडे होंगे तुमसें, सबका मान रख लेना बेटी। नहीं तो तुम्हारी ही माँ के संस्कारों में खामी होगी। बस यही शब्द गूंज रहे हैं कानों में उसके। अब तो मुहँ बन्द केवल हाँथ चल...